आध्यातम :- शिव तत्व
पुराण/शिव तत्व
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भारतीय जीवन दर्शन और भक्ति मूलक ग्रंथों में पुराण अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है ।यदि लिंग पुराण साहित्य और जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हैं तो भारतीय पुराण साहित्य में 18 पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को व्यक्त किया गया है । जिसमें पाप पुण्य धर्म अधर्म ,कर्म अकर्म, को आधुनिक जीवन के परिपेक्षय में परिभाषित कर मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य किया गया है।
भारतीय दर्शन में ब्रह्म के दो स्वरूपों की वयाख्या पाई जाती है । एक निर्गुण अर्थात निराकार और दूसरा सगुण आथार्त साकार रूप में ईश्वर तत्व को दर्शाया गया है । परंतु मूलता यह शक्ती एक ही जिसका अनेक रूप में वर्णन कर परा शक्तियों को परिभाषित कर समझने का प्रयास किया है। पुराण साहित्य सगुण शक्ति से प्रेरित अध्यात्म के रूप में अवतारवाद को परिभाषित करता अंधकार से प्रकाश की ओर मानव के मार्ग को प्रशस्त करता है । महर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों की रचना की है । पुराण प्राचीन काल से आज तक रोचक मानव जीवन मूल्यों से हमें बांधे परंपरा निर्वाहन का मार्ग प्रशस्त करते आ रहें है।
शिव तत्व ---- शिव ब्रह्म रूप निराकार है वह आकार या साकार रूप में बंधा नहीं है वह सृष्टि के आदि और अंत के रूप में व्याप्त है इसीलिए प्राचीन समय में शिव की पूजा किसी विशेष रूप में ना होकर निराकार लिंग रूप में ब्राह्मड के द्योतक रूप में व्याप्त परा शक्ति के रूप में की जाती है। वह निर्विकार भी है और वशिष्टि के रूप में साकार भी है । वह सृष्टि का आरंभ भी है और उसी से सृष्टि का अंत का भी संभव है। इसीलिए शिव को महाकाल भी कहा जाता है।
पौराणिक आधार पर सृष्टि कई मूल तत्वों से बनी है। जिसमें प्रथम पांच मूल तत्व है ,पृथ्वी जल ,अग्नि ,वायु और आकाश परंतु सबसे प्रमुख तत्व छठा शिव तत्व है । जिसका संबंध आज्ञा चक्र से है । यह आज्ञा चक्र मस्तिष्क के मध्य केंद्र में स्थित वह तत्व है जिसे ज्ञान का केंद्र कहा जाता है । यह आज्ञा चक्र 11 तत्वों का आधार है। मनुष्य अध्यात्म व इंद्रिय साधना से इन तत्वों को जागृत कर स्वयं की इच्छा शक्ति को जागृत कर परम स्थिति को पा सकता है।
शैव दर्शन के आधार पर भी शिव तत्व विद्या तत्व और आत्म तत्व की संयोजन शक्ति से हम स्वयं की इंद्रियों पर विजय पाकर तथा परम साधना की शक्ति से ईश्वर तत्व से साक्षात्कार कर सकते हैं।
संसार में अनेक ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपनी साधना से आज्ञा चक्र को जागृत कर साधना की परम स्थिति को प्राप्त कर जगत कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है।
मनीषा सुमन

This is just so amazingly penned.
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